डायबिटीज़ आज एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुकी है। यह सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है — जैसे नसें, किडनी और आंखें। न्यूरोपैथी, नेफ्रोपैथी और रेटिनोपैथी जैसी जटिलताएँ मरीज की ज़िंदगी पर गहरा असर डालती हैं।
इन्हें सही समय पर पहचानना और मैनेज करना एक डॉक्टर के लिए बेहद ज़रूरी है। यही वजह है कि AIHMS का डायबेटोलॉजी कोर्स डॉक्टरों को इन जटिलताओं से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग देता है।
AIHMS के बारे में जानें: https://www.aihms.in/
डायबेटोलॉजी कोर्स देखें: https://www.aihms.in/PG-Diploma-in-Diabetology.html
डायबेटोलॉजी में स्पेशल ट्रेनिंग क्यों ज़रूरी है?
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डायबिटीज़ सिर्फ शुगर नहीं, एक मल्टी-सिस्टम बीमारी है
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कई जटिलताएँ बिना लक्षणों के शुरू होती हैं
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सामान्य मेडिकल शिक्षा में इनकी गहराई से ट्रेनिंग नहीं होती
डायबेटोलॉजी कोर्स इन सभी गैप्स को भरता है।
डायबेटिक न्यूरोपैथी
नसों को नुकसान, जिससे पैर सुन्न होना, जलन, दर्द और घाव हो सकते हैं।
कोर्स में डॉक्टर सीखते हैं:
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नसों की जांच कैसे करें
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शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें
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सही दवाइयाँ और लाइफस्टाइल सलाह
डायबेटिक नेफ्रोपैथी
किडनी पर असर, जो धीरे-धीरे बढ़ता है।
कोर्स में शामिल है:
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माइक्रोएल्ब्यूमिन टेस्ट की समझ
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ब्लड प्रेशर कंट्रोल
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किडनी डैमेज की रोकथाम
डायबेटिक रेटिनोपैथी
आंखों की रोशनी को नुकसान।
कोर्स सिखाता है:
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फंडस जांच
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समय पर रेफरल
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आंखों की नियमित स्क्रीनिंग
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